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कब हुई Gallantry Awards की शुरुआत, ऐसा होता है इन अवार्ड्स के लिए चयन

साल में दो बारे दिए जाते हैं ये पुरस्कार

कब हुई Gallantry Awards की शुरुआत, ऐसा होता है इन अवार्ड्स के लिए चयन

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गणतंत्र दिवस (Republic Day) के अवसर पर दिए जाने वाले वीरता पुरस्कारों (Gallantry Awards) का एलान हो गया है। इन अवार्ड्स से हर साल शौर्य दिखाने वाले सेना, सीआरपीएफ, आईटीबीपी और पुलिस के जवानों और अधिकारियों को अलग-अलग वीरता पुरस्कारों से सम्‍मानित किया जाता है। इन वीरता पुरस्कारों का ऐलान साल में दो बार​ किया जाता है- गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) के मौके पर।

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इस बार 939 पुलिस कर्मियों को उनके शौर्य के लिए गैलेंट्री अवॉर्ड्स से सम्मानित किया जाएगा, जिसमें 189 वीरों को पुलिस मेडल से सम्मानित किया जाएगा। वहीं, विशिष्ट सेवा के लिए 88 वीरों को राष्ट्रपति का पुलिस मेडल (President Police Medal) और 662 को सराहनीय सेवा के लिए पुलिस मेडल दिया जाएगा। पुलिस मेडल पाने वाले 189 वीरों में से 134 कर्मियों को जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) क्षेत्र में उनकी वीरता के लिए सम्मानित किया जाएगा।

बता दें कि इनमें से कुछ पुरस्कार सिर्फ सैनिकों के लिए होते हैं, जबकि कुछ पुरस्कार पुलिस, जेलकर्मी और आम नागरिकों के लिए होते हैं। इन वीरता पुरस्कारों में सबसे अहम होता है, परमवीर चक्र, जो सर्वोच्च सैन्य पुरस्कार है। इसके बाद महावीर चक्र, कीर्ति चक्र, वीर चक्र, अशोक चक्र और शौर्य चक्र आते हैं। आइए जानते हैं इन सभी पुरस्कारों के बारे में-

वीरता पुरस्कारों की शुरुआत

देश को पूर्ण स्वतंत्रता मिलने के बाद से भारत सरकार हर साल जवानों और अधिकारियों को वीरता पुरस्कार से सम्मानित करती है। 26 जनवरी, 1950 को देश का संविधान लागू होने के साथ-साथ भारत सरकार ने प्रथम तीन वीरता पुरस्कारों परमवीर चक्र, महावीर चक्र और वीर चक्र की घोषणा की। हालांकि, इसे 15 अगस्‍त, 1947 से प्रभावी माना गया और इसके बाद भारत सरकार ने 4 जनवरी, 1952 को तीन अन्‍य वीरता पुरस्‍कारों की शुरुआत की। वहीं, हर साल देश के वीरों को सम्मान करने के लिए ये वीरता पुरस्कार दिए जाते हैं।

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ऐसे होता है चयन

वीरता पुरस्‍कारों के लिए देश की रक्षा में अतुलनीय योगदान देने वाले जवानों और अधिकारियों के नामों का चयन किया जाता है और फिर ये नाम रक्षा मंत्रालय के पास भेजे जाते हैं। बता दें कि रक्षा मंत्रालय में इसके लिए एक विशेषज्ञ समिति होती है- केंद्रीय सम्‍मान एवं पुरस्‍कार समिति, जो कि मंत्रालय के पास आने वाले सभी नामों पर विचार करती है और फिर मानकों के आधार पर पूरी प्रक्र‍िया के बाद यह समिति एक लिस्‍ट तैयार करती है, जिसमें वीरता पुरस्‍कार के लिए नाम तय होते हैं। इसके बाद फिर से यह लिस्‍ट राष्‍ट्रपति के पास भेजी जाती है और राष्‍ट्रपति की अनुमति के बाद इन पुरस्‍कारों की घोषणा की जाती है।

परमवीर चक्र: सर्वोच्च सैन्य पुरस्कार

परमवीर चक्र (Param Vir Chakra) भारत का सर्वोच्च शौर्य सैन्य पुरस्‍कार होता है। ये पुरस्कार यह दुश्मन के सामने अभूतपूर्व साहस दिखाने, शौर्य दिखाने और बलिदान के लिए दिया जाता है। यह सम्मान भारतीय सेना के किसी भी विंग के जवानों और अधिकारियों को दिया जाता है और यह पुरस्कार मरणोपरांत भी दिया जाता है यानी दुश्मनों से लड़ते शहीद होने वाले जवानों को बड़े ही सम्मान के साथ इस वीरता पुरस्कार से नवाजा जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, परमवीर चक्र हासिल करने वाले शूरवीरों में सूबेदार मेजर वीर बन्ना सिंह (Vir Bana Singh) इकलौते ऐसे व्यक्ति थे जो कारगिल युद्ध तक जीवित थे।

 

महावीर चक्र: युद्ध के समय वीरता का पदक

महावीर चक्र (Mahavir Chakra) भारत का ऐसा पदक है जो युद्ध के समय वीरता दिखाने के लिए दिया जाता है। यह पदक सेना और असैनिकों को असाधारण वीरता या शौर्यता या बलिदान के लिए दिया जाता है और यह पुरस्कार भी मरणोपरांत दिया जा सकता है। बता दें कि इस बार सेना में कमांडिंग ऑफिसर रहे कर्नल संतोष बाबू (Santosh Babu) को इसी महावीर चक्र से सम्मानित किया जा रहा है।


वीर चक्र: असाधारण वीरता और बलिदान का पदक

वीर चक्र (Vir Chakra) तीसरा सर्वोच्च सैन्य सम्मान है। ये सम्मान सैनिकों को असाधारण वीरता या बलिदान के लिए दिया जाता है। इस पुरस्‍कार की शुरुआत भी 26 जनवरी, 1950 को परमवीर चक्र और महावीर चक्र के साथ हुई थी। यह पुरस्कार मरणोपरांत भी सैनिकों को दिया जा सकता है।


कीर्ति चक्र: आम नागरिक भी हो सकते हैं योग्य

कीर्ति चक्र (Kirti Chakra) की स्थापना 4 जनवरी, 1952 को हुई थी। ये सम्मान सेना, वायुसेना और नौसेना के जवानों और अधिकारियों के अलावा टेरिटोरियल आर्मी और आम नागरिकों को भी दिया जाता है। अब तक यह पुरस्‍कार मरणोपरांत 198 शूरवीरों को दिया गया है।


शौर्य चक्र: शांति के समय का वीरता पदक

शौर्य चक्र (Shaurya Chakra) का नाम देश के सर्वोच्‍च वीरता पदकों में शांति के समय नाम आता है। वीरयता में यह कीर्ति चक्र के बाद का वीरता पदक है। यह पुरस्कार शांति काल के समय सैनिकों और असैनिकों को असाधारण वीरता, शौर्य प्रदर्शन के लिए या बलिदान के लिए दिया जाता है। यह पुरस्‍कार मरणोपरांत भी दिया जा सकता है।


अशोक चक्र: असाधारण वीरता और बलिदान का पदक

अशोक चक्र (Ashoka Chakra) का नाम भी शांति के समय दिए जाने वाले पुरस्कारों में आता है। यह सम्मान सैनिकों और असैनिकों को असाधारण वीरता, शूरता या बलिदान के लिए दिया जाता है। यह पुरस्कार मरणोपरांत भी दिया जा सकता है।

 


इन्हें मिलेगा वीरता का सम्मान

सीआरपीएफ के 30 जवानों को पुलिस मेडल, एसएसबी के तीन जवानों को पुलिस मेडल, ITBP को 3 पुलिस मेडल समेत कुल 18 शौर्य पुरस्‍कार, विशिष्ट सेवा के लिए 88 लोगों को राष्ट्रपति का पुलिस मेडल (पीपीएम), सराहनीय सेवा के लिए 662 जवानों पुलिस मेडल (पीएम), 42 जेल कर्मियों को सुधार सेवा मेडल और सराहनीय सेवा के लिए 37 सुधार सेवा मेडल दिए जाएंगे।

 

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