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श्री बृजराज स्वामी मंदिर: जानिए नूरपुर के उस ऐतिहासिक धाम के बारे में, जहां श्रीकृष्ण संग विराजती हैं मीरा
Shri Brijraj Swami Temple Nurpur:हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा स्थित ऐतिहासिक नूरपुर किला मैदान में बना श्री बृजराज स्वामी मंदिर अपनी एक अद्भुत विशेषता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। आमतौर पर मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधा रानी की प्रतिमाएं देखने को मिलती हैं, लेकिन यह विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर माना जाता है जहां श्रीकृष्ण के साथ मीरा बाई की मूर्ति स्थापित है।प्रेम, आस्था और अटूट भक्ति के इस अनोखे संगम के दर्शन के लिए वर्षभर देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
काले संगमरमर के कृष्ण और अष्टधातु की मीरा
मंदिर के गर्भगृह में राजस्थानी शैली में काले संगमरमर से निर्मित भगवान श्रीकृष्ण की अत्यंत मनमोहक प्रतिमा स्थापित है, जबकि उनके समीप अष्टधातु से बनी मीरा बाई की प्रतिमा सुशोभित है। इन सजीव प्रतिमाओं को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो दोनों साक्षात श्रद्धालुओं के सामने प्रकट हो गए हों।
चित्तौड़गढ़ से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
इस ऐतिहासिक मंदिर की स्थापना के पीछे नूरपुर के राजा जगत सिंह से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा है। सन् 1629 में राजा जगत सिंह अपने राजपुरोहित के साथ चित्तौड़गढ़ के राजा के निमंत्रण पर वहां गए थे। रात्रि विश्राम के दौरान राजा को समीप स्थित एक मंदिर से घुंघरुओं और मधुर संगीत की आवाजें सुनाई दीं।जब राजा ने उत्सुकतावश मंदिर की ओर झांका, तो उन्होंने देखा कि एक महिला श्रीकृष्ण की प्रतिमा के सामने भजन गाते हुए नृत्य कर रही थी। राजा ने यह बात अपने राजपुरोहित को बताई, जिस पर पुरोहित ने कहा कि ये प्रतिमाएं साक्षात भक्ति का प्रतीक हैं और इन्हें उपहार स्वरूप मांग लेना चाहिए। चित्तौड़गढ़ के राजा ने राजा जगत सिंह के आग्रह को सहर्ष स्वीकार करते हुए श्रीकृष्ण-मीरा की प्रतिमाएं और एक मौलश्री का पेड़ उपहार में दे दिया।
दरबार-ए-खास बना आस्था का केंद्र
प्रतिमाओं को नूरपुर लाने के बाद राजा जगत सिंह ने अपने ‘दरबार-ए-खास’ को ही भव्य मंदिर का रूप देकर वहां इन्हें स्थापित करवा दिया। कालांतर में यही स्थान श्री बृजराज स्वामी मंदिर के नाम से विख्यात हुआ। गौरतलब है कि प्राचीन काल में नूरपुर को ‘धमेड़ी’ के नाम से जाना जाता था। मुगल बेगम नूरजहां के आगमन के बाद इसका नाम बदलकर नूरपुर रखा गया था।
जन्माष्टमी पर उमड़ता है जनसैलाब
यूं तो यहां सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन जन्माष्टमी के पावन अवसर पर पूरे किला मैदान का स्वरूप कृष्णमय हो जाता है। दूर-दराज से आने वाले हजारों श्रद्धालु भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों के बीच भगवान श्रीकृष्ण और मीरा बाई के चरणों में शीश नवाते हैं। यह मंदिर नूरपुर की धार्मिक आस्था, राजपरंपरा और ऐतिहासिक विरासत का एक जीवंत प्रतीक बना हुआ है।
ऋषि महाजन
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