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जानिए ईपीएफ, पीपीएफ और जीपीएफ में क्या होता है अंतर, कितना मिलता है ब्याज

भविष्य को सेफ करने के लिए भारत में कई प्रकार की भविष्य निधि योजनाएं हैं मौजूद

जानिए ईपीएफ, पीपीएफ और जीपीएफ में क्या होता है अंतर, कितना मिलता है ब्याज

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भविष्य को सेफ करने के लिए भारत में कई प्रकार की भविष्य निधि योजनाएं मौजूद हैं। जैसे कि कर्मचारी भविष्य निधि, लोक भविष्य निधि और सामान्य भविष्य निधि योजना (Provident Fund, Public Provident Fund and General Provident Fund Scheme)। मगर इनमें अंतर क्या होता है शायद आपको पता नहीं होगा। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि इनमें आखिर अंतर क्या होता है। भविष्य निधि यानी की पीपीएफ योजना का मकसद नौकरी-पेशा करने वाले लोगों के भविष्य को सुरक्षित करना है। इसके तहत कुछ रकम जमा करने के बाद रिटायरमेंट (retirement) के बाद पैसा दिया जाता है। कर्मचारियों को नौकरी के दौरान उसमें रेगुलर निवेश करना होता है। फिर यह पैसा उन्हें रिटायरमेंट के बाद मिल जाता है। रिटायरमेंट के बाद किसी भी कर्मचारी को एक साथ ही सारी रकम मिल सकती है। अतः पीपीएफ (PPF) का उद्देश्य रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी के भविष्य को सुरक्षित करना होता है। वहीं ईपीएफ यानी कर्मचारी भविष्य निधि एक ऐसी प्रोविडेंट फंड योजना है जो सरकारी नौकरी करने वालों के लिए चलाई गई है। इस फंड को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन संचालित करता है। यह केंद्र सरकार की ही रिटायरमेंट फंड संस्था है।

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इस योजना के तहत अधिनियम 1952 के तहत (Under the Act 1952) प्रत्येक ऐसी कंपनी या कारपोरेट संस्था, जिसके पास बीस ज्यादा कर्मचारी हैं, को सेवानिवृत्ति के बाद लाभ देना होता है। वहीं ईपीएफओ के मौजूदा नियमों के अनुसार हर कर्मचारी हर माह अपने वेतन और महंगाई भत्ते यानी बेसिक सैलरी और डियरनेस अलाउंस का 12 प्रतिशत हिस्सा जिसमें अधिकतम सीमा 15,000 रुपए है (Maximum limit is Rs 15,000 को भविष्य निधि खाते में जमा करवाता है। वहीं नियोक्ता भी अपनी तरफ से 12 प्रतिशत हिस्सा डालता है। नियोक्ता के हिस्से में से 8.33 फीसदी कर्मचारी पेंशन योजना में चला जाता है, जबकि शेष 3.67 फीसदी हिस्सा ईपीएफ में निवेश किया जाता है। वर्ष 2022-23 के लिए ईपीएफ की ब्याज दर 8ण्1 फीसदी है। वहीं यदि कोई कर्मचारी रिटायर हो जाता है तो वह इस खाते को पूरी तरह से बंद करवा सकता है। वहीं नौकरी बदलने की स्थिति में ईपीएफ खाता स्थानांतरित किया जा सकता है।

नौकरी के दौरान भी ईपीएफ खाते से कुछ पैसा निकाला जा सकता है

वहीं नौकरी के दौरान भी ईपीएफ खाते से कुछ पैसा निकाला जा सकता है। मगर यह तभी मिलता है जब मकान बनाना हो, खरीदना हो या परिवार के किसी सदस्य का इलाज करवाना हो (When to build a house, buy or get a family member treated) । वहीं लोक भविष्य निधि यानी कि जीपीएफ। यह योजना अनिवार्य नहीं है। इसके तहत कोई भी भारतीय खाता खुलवा सकता है। चाहे वह नौकरीपेशा हो अथवा नहीं हो। इस खाते में हर वित्त वर्ष के दौरान कम से कम पांच सौ रुपए और अधिक से अधिक 1,50,000 रुपए जमा करवाए जा सकते हैं। ईपीएफ की तरह पीपीएफ खाता रिटायरमेंट पर ही बंद नहीं किया जाता है। बल्कि इसे 15 साल के लिए खोला जाता है। यदि खाताधारक चाहे तो इसे पांच-पांच साल के ब्लॉक में बढ़ा भी सकता है। पीपीएफ खाता खुलवाने के सातवें वित्तवर्ष से इस खाते में से भी पैसा निकाला जा सकता है। पीपीएफ खाते के लिए ब्याज दर केंद्र सरकार हर तिमाही में तय करती है।पीपीएफ खातों पर दी जाने वाली मौजूदा ब्याज दर 7ण्1 फीसदी है। वहीं सामान्य भविष्य निधि यानी जीपीएफ सिर्फ सरकारी कर्मचारियों के लिए ही होती है। सरकार के लिए लगातार एक साल तक काम कर चुके सभी अस्थायी कर्मचारी, सभी स्थायी कर्मचारी, रिटायरमेंट के बाद काम पर रखे गए सभी पेंशनधारक इसके तहत खाता खोल सकते हैं। इसके हर खाताधारक को अपने मासिक वेतन का कम से कम छह फीसदी हिस्सा खाते में निवेश करना पड़ता है। जीपीएफ पर मिलने वाले ब्याज की दर अक्टूबर.दिसंबर, 2022 की तिमाही के लिए 7ण्1 फीसदी है। जीपीएफ योजना को केंद्र सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के तहत पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग द्वारा संचालित किया जाता है।

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