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बाढ़ आने पर कैसे खोले जाते हैं बांध के गेट, यहां पढ़ें पूरी जानकारी
हमारे देश के कई हिस्सों में तेज बारिश (Rainfall) हो रही है। तेज बारिश के कारण कई नदियों में पानी का बहाव बढ़ गया है। इसी के चलते कई जगहों पर सरकार द्वारा बांध के गेट भी खोलने पड़े हैं। गेट खोलने के कारण बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर बांध (Dam) के गेट क्यों और कैसे खोले जाते हैं।आज हम आपको इस बाबत पूरी जानकारी देंगे।
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बता दें कि कई जगहों पर बांध के गेट खोलने के समय पूजा की जाती है। बांध के गेट खोलने के लिए एक प्रोसेस फॉलो किया जाता है। गेट खोलने से पहले परमिशन ली जाती है और उस जगह के प्रशासनिक अधिकारी कई बार जगह का दौरा करते हैं। बांध के गेट खोलने से पहले आसपास के लोगों को जानकारी दी जाती है। वहीं, अगर पानी निकास के क्षेत्र को भी खाली करवाया जाता है। इसके बाद बांध के गेट खोलने का काम किया जाता है।
बजाया जाता है सायरन
जानकारी के अनुसार, बांध का गेट खोलने से पहले तेज आवाज में हर मिनट में सायरन (Siren) बजाया जाता है। ये सायरन बांध से करीब तीन-चार किलोमीटर के दायरे तक सुनाई देता है।
ऐसे खोले जाते हैं गेट
बांध के गेट घर के गेट की तरह नहीं होते हैं। ये गेट दुकान के शटर की तरह होते हैं, जो नीचे से ऊपर जाते हैं। इन गेट के ऊपर हाई पावर की मोटर लगी होती है। जब भी किसी बांध के गेट को खोलना होता है तो कंट्रोल रूम के जरिए मोटर का इस्तेमाल करके गेट को ऊपर उठाया जाता है। इसके लिए लोहे की वायर की मदद ली जाती है।
हालांकि, अब बहुत सारे बांध ऐसे हैं, जिनमें हाइड्रोलिक गेट लगा दिए गए हैं। इन्हें समय-समय पर चेक किया जाता है। इन सभी गेट का सिस्टम एक पॉवर पैक तक जुड़ता हैं, जहां से फिर उन्हें ऑपरेट किया जाता है। वहीं, जिन जगहों पर हाइड्रोलिक सिलेंडर होते हैं, उन्हें प्रेशर की मदद से ऑपरेट किया जाता है।
पूरी तरह नहीं खुलते गेट
बता दें कि ये गेट पूरी तरह से नहीं खुलते हैं। गेट लंबाई के हिसाब से ऊपर किए जाते हैं। इसके अलावा बांध के गेट पानी के हिसाब से और बांध की क्षमता के आधार पर तय किया जाता है। कई बार ये गेट एक फीट तो कई बार कुछ इंच तक ही खोले जाते हैं।

