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शिमला जिला परिषद चुनाव में हार निराशाजनक, समीक्षा की जरूरत: रोहित बोले- उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं मिले
Education Minister Rohit Thakur: शिमला जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर बीजेपी की जीत के बाद हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने चुनाव परिणामों को कांग्रेस पार्टी के लिए निराशाजनक करार दिया है। उन्होंने कहा कि शिमला जिला लंबे समय से कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा है, लेकिन पंचायती राज चुनावों में पार्टी को उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं मिले। ऐसे में इन नतीजों की गंभीरता से समीक्षा और आत्ममंथन करने की सख्त आवश्यकता है।
चुनाव परिणामों पर आत्ममंथन की जरूरत
शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिमला जिले में कांग्रेस का मजबूत नेतृत्व रहा है। जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र से सभी जिला परिषद सदस्य जीतकर आए हैं, लेकिन जिले के अन्य विधानसभा क्षेत्रों से अपेक्षा के अनुरूप परिणाम नहीं मिल सके। इसी वजह से कांग्रेस जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद हासिल नहीं कर पाई।पार्टी को यह स्वीकार करना होगा कि किन क्षेत्रों में कमी रही और अपेक्षित परिणाम क्यों नहीं मिल पाए।इस संबंध में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के साथ चर्चा कर रणनीति बनाई जाएगी। विधानसभा चुनावों में लगभग एक वर्ष का समय शेष है, इसलिए संगठन को मजबूत कर आगे बढ़ना जरूरी है।
दिल्ली दौरा और कैबिनेट बैठक पर स्थिति साफ
अपने दिल्ली दौरे को लेकर रोहित ठाकुर ने बताया कि उनका शिक्षा विभाग से संबंधित कार्यक्रम पहले से तय था। दिल्ली प्रवास के दौरान पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात होना स्वाभाविक था, जहां सरकार और संगठन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि पार्टी से जुड़ी कुछ आंतरिक बातें सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं।हिमाचल प्रदेश कैबिनेट की बैठक अचानक स्थगित होने पर चल रही अटकलों को खारिज करते हुए शिक्षा मंत्री ने किसी भी तरह के मनमुटाव या मतभेद से साफ इनकार किया। उन्होंने कहा कि सभी मंत्री बैठक के लिए शिमला पहुंचे थे, लेकिन बैठक क्यों स्थगित हुई, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।
साक्षरता दर में देश में दूसरे स्थान पर हिमाचल
देश भर में साक्षरता दर के मामले में हिमाचल प्रदेश के दूसरे नंबर पर आने पर शिक्षा मंत्री ने खुशी जताई। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों वाले पहाड़ी राज्य का 5 प्रतिशत से 99.5 प्रतिशत साक्षरता दर तक पहुंचना लंबे समय के प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार द्वारा रखी गई मजबूत नींव, पूर्ववर्ती सरकारों के निरंतर निवेश और शिक्षकों के अथक योगदान को दिया।
संजू चौधरी
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