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हिमाचल: बाबा बालक नाथ दियोटसिद्ध प्रशासन ने श्रद्धालुओं को दिया झटका, रात को नहीं मिलेंगी ये सुविधाएं

कोरोना के चलते लिया फैसला, न्यासियों ने जताया ऐतराज, बोले-परेशान होंगे श्रद्धालु

हिमाचल: बाबा बालक नाथ दियोटसिद्ध प्रशासन ने श्रद्धालुओं को दिया झटका, रात को नहीं मिलेंगी ये सुविधाएं

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हमीरपुर। हिमाचल के प्रसिद्ध शक्तिपीठ बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध (Baba Balak Nath Temple Deotsidh) में अगर आप जाने का प्रोग्राम बना रहे हैं तो यह खबर आपके काम की है। रात 9 बजे के बाद पहुंचने पर आपको मंदिर में रहने और खाने की सुविधा (Living and Food facilities) नहीं मिलेगी। मंदिर प्रशासन (Temple administration) ने कोरोना के लगातार बढ़ रहे मामलों को ध्यान में रखते हुए रात्रि के समय मंदिर की सराय और लंगर को बंद रखने का निर्णय लिया है। हांलाकि प्रशासन के इस निर्णय का मंदिर न्यास दियोटसिद्ध के अधिकांश न्यासी ऐतराज जता रहे हैं। उनका कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह से गलत है। दियोटसिद्ध मंदिर के न्यासियों ने कहा कि इस वक्त चैत्र मास चला हुआ है व न्यास द्वारा इस समय श्रद्धालुओं को ज्यादा से ज्यादा सुविधा दी जानी चहिएए लेकिन मंदिर प्रशासन ने अतिरिक्त सुविधाएं देने के बजाय पहले से दी जा रही सुविधाओं को भी बंद करने का फैसला लिया है।


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प्रशासन के इस निर्णय से अब श्रद्धालु (Devoted) ठहरने व खाने जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए जगह-जगह भटकने के लिए मजबूर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि मंदिर को नए शैडयूल के मुताबिक रात को 9 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक बंद रखने का निर्णय लिया गया है। ऐसे में जो श्रद्धालु रात को यहां पहुंचेंगे, उन्हें ना तो रात को दर्शनों की सुविधा मिलेगी और सरांय बंद होने के कारण उन्हें रात्रि ठहराव के लिए मंदिर की तरफ से कोई प्रबंध मिलेगा। ऐसे में श्रद्धालु कहां जाएंगे यह बड़ा प्रश्न है। न्यासियों ने कहा कि खाना व रहना मूलभूत सुविधाओं की श्रेणी में आता है व कोरोना (Corona) से एहतियात के नाम पर मूलभूत सुविधाओं को छीनना किसी भी सूरत में जायज नहीं है। उन्होंने कहा कि जहां तक कोरोना की बात है तो दियोटसिद्ध में सारी व्यवस्था सरकार की एसओपी (SOP) में जारी गाइडलाइन के मुताबिक ही चल रही है। यह निर्णय आनन.फानन में लिया गया हैए इसलिए डीसी हमीरपुर व मंदिर न्यास के कमिश्नर को इस निर्णय पर पुर्नविचार करना चहिए। ताकि मंदिर को करोड़ों रुपए का चढ़ावा देने वाले भक्तों को रहने-खाने जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित ना होना पड़े।

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