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हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला, 10 साल की नियमित सेवाओं के बाद होंगे पेंशन के हकदार

एकल पीठ व अन्य खंडपीठ के फैसलों में विरोधाभास उत्पन्न हो गया था

हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला, 10 साल की नियमित सेवाओं के बाद होंगे पेंशन के हकदार

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शिमला। हिमाचल हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है कि सरकारी कर्मी भी पेंशन लेने का अधिकार तभी रखता है। जब वह नियमित सेवा का दस वर्ष का सेवाकाल पूरा किया हो। पेंशन से जुड़े मामले में प्रदेश उच्च न्यायालय की तीन जजों की पीठ ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुंदर सिंह नामक मामले में पारित फैसले की व्याख्या करते हुए यह स्पष्ट किया कि बतौर दिहाड़ीदार की गई सेवा और नियमित सेवा के कार्यकाल को जोड़ कर यदि सरकारी कर्मी के दस वर्षो का सेवाकाल बनता है, तभी सरकारी कर्मी पेंशन लेने का हक रखेगा।

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गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने सुंदर सिंह नामक मामले में यह व्यवस्था दी है कि 5 वर्ष की दिहाड़ीदार सेवा को 1 वर्ष की नियमित सेवा के बराबर गिना जाएगा। 10 वर्ष की दिहाड़ीदार सेवा को 2 वर्ष की नियमित सेवा के बराबर माना जाएगा। ताकि कर्मी 1 या 2 वर्षो की नियमित सेवा की कमी के चलते पेंशन के लाभ से वंचित ना हो सके। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर, न्यायाधीश अजय मोहन गोयल व न्यायाधीश चंद्रभूसन बारोवालिया की पीठ ने बालों देवी के मामले में यह फैसला सुनाते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलीमठ, न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने पारित फैसले से सहमति जताई।

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बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुंदर सिंह नामक फैसले को लेकर एकल पीठ व अन्य खंडपीठ के फैसलों में विरोधाभास उत्पन्न हो गया था। जिस कारण मामले को तीन जजों की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए रखा गया था। एकल पीठ व अन्य खंडपीठ का यह मत था कि अगर नियमित सेवा के साथ दिहाड़ीदार सेवा का लाभ देते हुए 8 वर्ष की सेवा का कार्यकाल पूरा हो जाता है, तो उस स्थिति में सरकारी कर्मी पेंशन लेने का हक रखेगा। उल्लेखनीय है कि सुंदर सिंह के फैसले में 8 साल की सेवा को 10 वर्ष आंकने का भी जिक्र किया गया है। जबकि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ का यह मत था कि नियमित सेवा के साथ दिहाड़ीदार सेवा का लाभ देते हुए अगर 10 वर्ष की सेवा का कार्यकाल पूरा होता है, तभी सरकारी कर्मी नियमित पेंशन लेने का हक रखेगा।

न्यायिक अकादमी परिसर का किया उद्घाटन

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश व हिमाचल प्रदेश न्यायिक अकादमी के संरक्षक न्यायाधीश रवि मलिमठ ने ऑनलाइन न्यायिक अकादमी परिसर में बने आवासों का उदघाटन किया। हिमाचल प्रदेश न्यायिक अकादमी के अध्यक्ष व हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान के अलावा हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों में न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर, न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर, न्यायाधीश अजय मोहन गोयल, न्यायाधीश संदीप शर्मा, न्यायाधीश चंदर भूसन बारोवालिया, न्यायाधीश अनूप चितकारा, न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ और न्यायाधीश सत्येन वैद्य भी इस अवसर पर उपस्थित थे। हिमाचल प्रदेश न्यायिक अकादमी के निदेशक आर. के. शर्मा ने गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत व धन्यवाद किया।

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