Covid-19 Update

2,01,049
मामले (हिमाचल)
1,95,289
मरीज ठीक हुए
3,445
मौत
30,067,305
मामले (भारत)
180,083,204
मामले (दुनिया)
×

3D Printing का कमाल – 48 घंटे में तैयार होगा पानी पर तैरने वाला घर

3D Printing का कमाल – 48 घंटे में तैयार होगा पानी पर तैरने वाला घर

- Advertisement -

एक घर बनाने में काफी महीने लग जाते हैं। अगर बात करें एक कमाल के घर की जो पानी पर तैर सके और 100 साल टिके तो आप कहेंगे कि इसमें तो साल भी लग सकता है। लेकिन हम कहें कि 48 घंटे में तैयार होगा तो आप यकीन नहीं करेंगे। 3D प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी (3D printing technology) की मदद से चेक रिपब्लिक में छोटा सा तैरने वाला घर तैयार किया जा रहा है। इसका डिजाइन Prvok यहां का पहला 3D प्रिंटेड घर होगा। इसका स्ट्रक्चर केवल 48 घंटे में तैयार किया जाएगा और इसकी मदद से 50 प्रतिशत बिल्डिंग कॉस्ट भी बचेगी।


 

100 साल तक जस के तस बने रह सकते हैं ये घर

क्रिएटर्स माइकल टरपाक और द एर्स्टे ग्रुप की ओर से इस कॉन्सेप्ट को हकीकत में बदलने का काम शुरू कर दिया गया है। इसी महीने 3D प्रिंटिंग शुरू हो जाएगी। उनका कहना है कि इस प्रोजेक्ट के बाद कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री (Construction industry) पूरी तरह से बदल जाएगी। खास बात यह है कि घर बनाने का नया तरीका पर्यावरण के लिए भी अच्छा है और इसमें सामान्य तरीके के मुकाबले 20 प्रतिशत तक कम कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। इस तरह तैयार किए गए घर 100 साल तक जस के तस बने रह सकते हैं। नई टेक्नोलॉजी की मदद से अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से घंटों में घर डिजाइन किए जा सकेंगे और इसका खर्च भी पहले के मुकाबले कम होगा।

 

केवल 25 वर्कर्स की जरूरत पड़ी

3D प्रिटिंग का काम रोबॉट्स करेंगे। इन रोबॉट्स का नाम Scoolpt है और ये ऑटो-मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल किए जाते हैं। नए 3D प्रिटिंग मेथड की मदद से घर बनाने में पुराने तरीकों के मुकाबले सात गुना कम वक्त लगेगा। इस टेक्नॉलजी की मदद से हर सेकेंड करीब 6 इंच प्रिटिंग की जा सकती है। इस तरह केवल 48 घंटे में 463 स्क्वायर फीट का घर तैयार किया जा सकता है। पूरे घर को तैयार करने के लिए केवल 25 वर्कर्स की जरूरत पड़ी। वहीं, पुराने तरीकों से से ऐसा घर तैयार करने के लिए करीब 65 वर्कर्स की जरूरत पड़ती। इस तरह घर बनाने की कॉस्ट के अलावा 3D प्रिटिंग की मदद से ह्यूमन एफर्ट्स भी कम किए जा सकते हैं। घर बनाने वाला यह रोबॉट एक नई तरह के कंक्रीट का इस्तेमाल करता है। इस कंक्रीट में फाइबर्स भी मिले होते हैं, जिससे ऑर्गेनिक शेप्स आसानी से बनाए जा सकते हैं। करीब 28 दिन में यह कंक्रीट किसी पुल जितना मजबूत हो जाता है।

हिमाचल और देश-दुनिया की ताजा अपडेट के लिए join करें हिमाचल अभी अभी का Whats App Group

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper


विशेष




सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है