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भारतीय Budget इतिहास के बारे में खास बातें, इस बजट में जो हो रहा कभी नहीं हुआ Live Report

भारतीय Budget इतिहास के बारे में खास बातें, इस बजट में जो हो रहा कभी नहीं हुआ Live Report

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देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) पहली फरवरी यानी सोमवार को बजट पेश करेंगी। इस बार का बजट खास है,उसके कई कारण है। हिमाचल अभी अभी की लाइव रिपोर्ट में भी उसका पूरा जिक्र किया गया है। ऐसा पहली मर्तबा हुआ है जब बजट (Budget) दस्तावेज की छपाई नहीं हुई है। यानी इस बार का बजट पूरी तरह से पेपरलेस (Paperless) है और इसे डिजिटल ही रिलीज किया जाएगा। अमूमन बजट तैयार करने की प्रक्रिया पांच माह पहले से ही शुरू हो जाती है,इसे साल भर का लेखा-जोखा कहा जाता है। बजट कई अहम बैठकों के बाद तैयार किया जाता है।


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पहली फरवरी को बजट पेश होने से एक दिन पहले इकोनॉमिक सर्वे पेश किया जाता है,हालांकि इस मर्तबा इकोनॉमिक सर्वे (Economic Survey) बजट से दो दिन पहले यानी 29 जनवरी को ही पेश हो गया है। इकोनॉमिक सर्वे यानी आर्थिक सर्वेक्षण में बीते साल का लेखा-जोखा और आने वाले साल के लिए सुझाव,चुनौतियां और समाधान होते हैं। बजट पेश होने के बाद इसे संसद के दोनों सदनों यानी लोकसभा (Loksabha) और राज्यसभा में पास करवाना होता है। दोनों सदनों में पास होने के बाद पहली अप्रैल से इसे लागू किया जाता है। भारत में वित्तीय वर्ष पहली अप्रैल से 31 मार्च तक रहता है।

 

आइए आपको भारत के बजट के इतिहास के बारे में रोचक जानकारी देते हैं। किसने पहली बाहर बजट पेश किया। किससे पास सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड है। कौन हैं भारत की पहली वित्त मंत्री, किसने-किसने पीएम रहते हुए पेश किया बजट।

1. कहां से आया बजट शब्द

बजट शब्द असल शुरुआत भी वैसे ही हुई है जैसे आप अकसर किसी भी शब्द के बारे में सुनते हैं कि ये शब्द लैटिन भाषा से लिया गया है। लैटिन शब्द बुल्गा से ही परिवर्तित होते-होते बजट शब्द आया। लैटिन भाषा में बुल्गा का मतलब होता है चमड़े का थैला। इसके बाद बुल्गा शब्द फ्रांस की भाषा में बोऊगेट हो गया, फिर कुछ अपभ्रंश के बाद यह शब्द अंग्रेजी भाषा में अपने स्पैलिंग के चलते बोगेट या बोजेट बना और आखिरकार बजट शब्द बना।

2. आजाद भारत का पहला बजट

देश का पहला बजट सात अप्रैल 1860 को ब्रिटिश सरकार (British Government) के वक्त वित्त मंत्री जेम्स विल्सन (James Wilson) ने पेश किया था। आजादी के बाद पहला बजट देश के पहले वित्त मंत्री आरके षणमुखम चेटृटी ने 26 नवंबर 1947 को पेश किया था। ये बजट 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक के लिए था। षणमुखम चेट्‍टी ने ही पहली मर्तबा 1948-49 के बजट के लिए अंतरिम (Interim) शब्द का इस्तेमाल किया था। इसके बाद ही छोटी अवधि के बजट के लिए अंतरिम शब्द का इस्तेमाल चलन में आया। 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र की स्थापना के बाद पहला बजट 28 फरवरी 1950 को जॉन मथाई ने पेश किया था।

3. जब लीक हो गया बजट

भारत के बजट की छपाई पहले राष्ट्रपति भवन में होती थी, लेकिन साल 1950 का बजट पेपर ही लीक हो गया। इसके बाद से बजट पेपर की छपाई दिल्ली के मिंटो रोड स्थित सिक्योरिटी प्रेस में की जाने लगी, फिर 1980 से बजट की छपाई नॉर्थ ब्लॉक से प्रिंट हो रही है। बजट की सबसे खास बात यह है कि इसे तैयार करने में ही बहुत गोपनीयता बरती जाती है। बजट जब तैयार हो जाता है तो उसे छपाई के लिए भेजने से पहले वित्त मंत्रालय में हलवा बांटने की रस्म है। हलवा बांटने के बाद बाद बजट पेश होने तक वित्त मंत्रालय के जो अधिकारी इस काम में शामिल रहे हैं वो अपने परिवार तक से संपर्क नहीं कर सकते। यानी वो इस दौरान परिवार से भी दूर रहते हैं। ऐसा बजट की गोपनीयता बरकरार रखने के लिए किया जाता है। इस दौरान बजट बनाने वाले अधिकारियों को वित्त मंत्रालय में ही ठहराया जाता है।

 

 

4. पीएम भी पेश कर चुके हैं बजट

बतौर पीएम भारत का बजट पेश करने का रिकॉर्ड पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के पास है। दरअसल ये सभी पीएम के साथ ही वित्त मंत्रालय भी खुद ही संभाल रहे थे। सबसे पहले 1958-59 के बजट को तत्कालीन पीएम जवाहरलाल नेहरू ने पेश किया था। इसके बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने भी बतौर पीएम भारत का आम बजट पेश किया था।

5. कौन हैं भारत की पहली महिला वित्त मंत्री

भारत की पहली महिला वित्त मंत्री कौन हैं। इसके जवाब भी दो रूप में सामने आता है। दरअसल इंदिरा गांधी ने 1970 का बजट पेश किया था, लेकिन उस समय वो पीएम भी थीं और वित्त मंत्रालय भी वो खुद ही देख रही थीं। वह पहली महिला थीं, जिन्होंने बजट पेश किया था, लेकिन अब क्योंकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण हैं और वो पीएम भी नहीं हैं तो इस लिहाज से निर्मला सीतारमण भारत की पहली महिला वित्त मंत्री हैं।

6. सबसे ज्यादा बार किसने पेश किया बजट

देश के पूर्व पीएम मोरारजी देसाई के नाम सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड है। मोरारजी देसाई ने 10 बार देश का बजट पेश किया वो छह बार वित्त मंत्री और चार बार डिप्टी पीएम भी रहे। उनके द्वारा पेश किए गए दस बजट में दो अंतरिम बजट (Interim Budget) भी शामिल हैं। उनके बारे में दो और रोचक बाते हैं। पहली बात यह कि अपने जन्मदिन पर वो दो बार बजट पेश कर चुके हैं। ये रिकॉर्ड उनके नाम पर दर्ज है। इसके अलावा दूसरी रोचक बात ये है कि मोरारजी देसाई का जन्म 29 फरवरी को हुआ। इस वजह से वो उनका जन्मदिन चार साल में एक बार आता था। मोरारजी देसाई के अलावा पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी सात बार भारत का बजट पेश कर चुके हैं।

 

7. अटल सरकार ने तोड़ी बजट परंपरा

इसके साथ ही भारत के बजट के बारे में एक और रोचक बात ये है कि 2000 तक बजट शाम के पांच बजे संसद में पेश होता था। ये परंपरा अंग्रेजों की बनाई हुई थी। 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने अंग्रेजों की इस परंपरा को बदल दिया। इसके बाद से अब सुबह 11 बजे संसद में भारत का बजट पेश किया जा रहा है। दरअसल ब्रिटेन की परंपरा के मुताबिक शाम के समय बजट पेश होता था। इसलिए यह परंपरा अंग्रेजों के बाद भारत में भी चलती रही। पहली मर्तबा सुबह 11 बजे तत्कालीन वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने बजट पेश किया था। शाम को बजट पेश करने की परंपरा सर बेसिल ब्लैकेट ने 1924 में शुरू की थी।

8.मोदी सरकार ने भी बनाई नई परंपराएं

नरेंद्र मोदी ने नेतृत्व वाली सरकार ने भी कई परंपराएं तोड़ीं और नई परंपराएं बनाईं। दरअसल 2017 से पहले बजट फरवरी महीने के आखिरी कामकाजी दिन संसद में पेश होता था, लेकिन 2017 से इसे पहली फरवरी या फरवरी के पहले वर्किंग डे पर पेश किया जाने लगा है। इसके अलावा 2017 के बजट से ही केंद्र सरकार ने रेल बजट को आम बजट में शामिल कर लिया। इससे पहले रेल बजट अलग और आम बजट अलग से पेश किया जाता था।

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