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अब गुर्जरों ने रोका हाटी के एसटी स्टेटस का रास्ता, हाईकोर्ट ने लगाया स्टे
विधि संवाददाता/शिमला।हिमाचल हाईकोर्ट ने (Himachal HC) गुरुवार को हाटी समुदाय (Hattee Community) को जनजाति का दर्जा देने के खिलाफ गुर्जरों की याचिका की सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकार दोनों की अधिसूचना पर रोक (Stay) लगा दी है। केंद्र सरकार ने पिछले साल सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र (Giripar Area Sirmour) के हाटी समुदाय को एसटी का दर्जा दिया था। इसे चार दिन पहले हिमाचल सरकार ने भी अनुमोदित किया था। हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश (Interim Order) के तहत अब दोनों अधिसूचनाओं पर 18 मार्च तक रोक लग गई है।
यह रोक गुज्जर और एससी समुदाय (Gurjar and ST Community) की तरफ से हाटी को जनजातीय दर्जा देने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील पर लगाई गई है। मुख्य न्यायाधीश एम एस रामचंद्र राव व न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने अपने अंतरिम आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि जब केंद्र सरकार पहले ही इस मुद्दे को तीन बार नकार चुकी थी तो इसमें कानूनी तौर पर ऐसा क्या रह गया था कि उसे सिरमौर जिले के ट्रांसगिरी के लोगों को जनजातीय क्षेत्र घोषित करने के लिए कानून बनाना पड़ा।
केंद्र ने तीन बार नकार दिया था
साल 1995, 2006 और 2017 में ट्रांसगिरी क्षेत्र (Transgiri Area) के लोगों को जनजातीय क्षेत्र का दर्जा देने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष भेजा गया था। केंद्र सरकार ने हर बार इस मामले को तीन प्रमुख कारणों से नकार दिया था। इन कारणों में एक तो उक्त क्षेत्र की जनसंख्या में एकरूपता (Uniformity) का न होना बताया गया। दूसरा हाटी शब्द सभी निवासियों को कवर करने वाला एक व्यापक शब्द है। तीसरा कारण था कि हाटी किसी जातीय समूह को निर्दिष्ट नहीं करते हैं।
याचिका में रखी हैं ये दलीलें
कोर्ट ने कानूनी तौर पर इन्हें जनजातीय क्षेत्र का दर्जा दिया जाना प्रथम दृष्टया वाजिब नहीं पाया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिना जनसंख्या सर्वेक्षण (Census) के ही उक्त क्षेत्र की जनजातीय क्षेत्र घोषित कर दिया गया। अलग-अलग याचिकाओं में यह दलील दी गई है कि वे पहले से ही अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति से सम्बंध रखते है। प्रदेश में कोई भी हाटी जनजाति नहीं है और आरक्षण का अधिकार हाटी के नाम पर उच्च जाति के लोगों को भी दे दिया गया, जो कि कानूनी तौर पर गलत है। किसी भी भौगोलिक क्षेत्र को किसी समुदाय के नाम पर तब तक अनुसूचित जनजाति घोषित नहीं किया जा सकता जब तक वह अनुसूचित जनजाति के रूप में सजातीय होने के मानदंड को पूरा नहीं करता हो।
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केंद्र ने सितंबर में दिया था एसटी का दर्जा
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर 2022 में हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के हाटी समुदाय को आदिवासी दर्जा देने की घोषणा की थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने 4 अगस्त को जारी अधिसूचना के तहत ट्रांसगिरी क्षेत्र के हाटी को अनुसूचित जनजाति में शामिल कर दिया था।
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