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मकर संक्रांति पर तत्तापानी में पवित्र स्नान व तुला दान के लिए उमड़ी भीड़
Makar Sankranti 2025: आज मकर संक्रांति (Makar Sankranti)है। इस अवसर पर शिमला और मंडी जिला की सीमा पर स्थित धार्मिक स्थल तत्तापानी में श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमड़ी है। मकर संक्रांति पर तत्तापानी में पवित्र स्नान ( Holy Bath)और तुलादान का विशेष महत्व रहता है। लोग यहां पर सुबह से ही तुलादान ( Tuladaan) करवाने के लिए पहुंचे हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां पर स्नान करने से चर्म रोग दूर होते हैं। जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इस दिन से ही ऋतु में भी परिवर्तन होने लगता है।

मकर संक्रांति पर्व पर तुलादान का महत्व
इसके अलावा मकर संक्रांति (Makar Sankranti)पर्व पर तुलादान करने का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन नवग्रहों की शांति के लिए तत्तापानी में हजारों की संख्या में श्रद्धालु तुलादान करवाते हैं। यह जगह तुलादान के लिए काफी मशहूर है। खासकर ज्येष्ठ शनिवार को यहां बड़ी संख्या में लोग तुलादान को पहुंचते हैं। यहां तुलादान करवाने से ग्रह शांत होते हैं। मकर संक्रांति पर चावल, उड़द की दाल और ऊनी कपड़ों का दान किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन धार्मिक स्थलों पर स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति के दिन तत्तापानी में खिचड़ी दान करने की सदियों से परंपरा चली आ रही है। ऐसे में इस धार्मिक तीर्थ स्थल में जगह-जगह प्रसाद के रूप में खिचड़ी खिलाई जा रही है।

धार्मिक पर्यटन स्थल बना है तत्तापानी
साल 2013 में सतलुज नदी पर सरकार ने कौल डैम (Koldam Dam) बनाया था। इससे पुराना जलाशय जलमग्न हो गया। इसके बाद जियोलॉजिकल विभाग ने ड्रिल करके सतलुज नदी के किनारे गर्म पानी निकाला। यहां पर अब श्रद्धालुओं के स्नान के लिए कुंड बनाए गए हैं। कृत्रिम झील के साथ लगते विश्व प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल तत्तापानी में तीन दिवसीय जिला स्तरीय लोहड़ी व मकर संक्रांति मेले का आयोजन हो रहा है।

स्नान से चर्म रोग भी होते हैं दूर
तत्तापानी को ऋषि जमदग्नि और परशुराम की तपोस्थली के रूप में जाना जाता है। आदि काल से मान्यता है कि परशुराम ने यहां स्नान करने के बाद अपनी धोती निचोड़ी थी, जहां-जहां धोती निचोड़ने से पानी के छींटे पड़े, वहां गर्म पानी के चश्मे फूट पड़े थे। तत्तापानी में सदियों से लोग बैसाखी व लोहड़ी स्नान कर पुण्य के भागीदार तो बनते ही आ रहे हैं, लेकिन यहां स्नान करने से चर्म रोग से भी निजात पाते हैं। ऐसे में लोगों की इन चश्मों के प्रति गहरी आस्था है।
संजू चौधरी

