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बिना मंडप के संपन्न नहीं होती हिंदू धर्म में शादी, जानें इसका महत्व

चार पिलरों को जोड़कर बनाया जाता है मंडप

बिना मंडप के संपन्न नहीं होती हिंदू धर्म में शादी, जानें इसका महत्व

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हमारे देश में हर धर्म की अपनी-अपनी परंपराएं हैं। हिंदू धर्म में मंडप (Mandap) एक खास महत्व रखता है। मंडप चार स्तंभों को जोड़कर बनाया जाता है। हिंदू धर्म में मंडप के बिना शादी संपन्न नहीं होती है। आज हम आपको मंडप का महत्व बताएंगे।

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कहा जाता है कि शुभ कार्यों को घरों की चार दीवारी के अंदर किया जाना चाहिए। ऐसा करने से सुख-समृद्धि आती है। इसी धारणा से मंडप भी अस्तित्व में आया। मंडप चार पिलरों को जोड़कर बनाया जाता है। ये चार पीलर हिंदू धर्म में जीवन के चार चरणों को दर्शाते हैं, जिसमें ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यास शामिल हैं।

मान्यता है कि मंडप वे स्थान है जहां लड़का अपने ब्रह्मचर्य जीवन से निकल कर गृहस्थ बन जाता है। यानी अब उसे घर संभालने के साथ नई जिम्मेदारियों को निभाना होगा। ऐसे ही धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जीवन के चार अहम पहलू हैं, जिन्हें पति-पत्नी को अपने जीवन में बनाए रखने की कसमें खाते हैं।

इसके अलावा मंडप घर की दीवारों का प्रतीक है। मंडप ऐसी जगह है जहां से पुरुष और महिला वैवाहिक जीवन में प्रवेश करने का फैसला लेते हैं। मंडप से दो लोगों का मिलन होता है। इसलिए मंडप के बिना शादी संपन्न नहीं मानी जाती है। मंडप को ज्यादातर पीले और लाल रंग के कपड़े और फूलों से सजाया जाता है। जबकि, दक्षिण भारत में मंडप को केले, पान और आम के पत्तों से सजाया जाता है। मंडप में दूल्हा-दुल्हन के सामने पानी से भरा कलश और नारियल रखा जाता है। ये कलश मानव शरीर का प्रतिनिधित्व करता है। इसका अर्थ है कि मानव शरीर में जो आत्मा है वे शुद्ध है। इस कलश को पांच आम के पत्तों से सजाया जाता है।

कलश के ऊपर नारियल रखने का एक अलग महत्व है। नारियल दिमाग का प्रतीक है, वहीं पांच पत्ते मानव शरीर की पांच इंद्रियों की ओर संकेत करते हैं। कच्चे चावल या धान को समृद्धि और धन से जोड़कर देखा जाता है। इसका मतलब होता है दूल्हा-दुल्हन के घर में धन की कभी कमी नहीं होगी और हमेशा समृद्धि बनी रहेगी।

वेदों में अग्नि को पवित्रता और आध्यात्मिकता का प्रतीक बताया गया है। हर शुभ कार्य का साक्षी अग्नि को माना जाता है। मंडप के बीच भी अग्नि को साक्ष्य मानकर फेरे लिए जाते हैं। विवाह में मंडप में अग्नि में घी, जड़ी-बूटी और आम की लकड़ी को जलाया जाता है। माना जाता है कि अग्नि के साथ निभाई गई सभी रस्में धर्म से जुड़ी हुई होती हैं और अग्नि के सामने किए गए वादे दूल्हा-दुल्हन को उसके वैवाहिक जीवन में बांधने का काम करते हैं।

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