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हिमाचल उपचुनाव: वीरभद्र सिंह अमर रहे के नारे, सम्मान या सेंधमारी की कोशिश
शिमला। सियासत की बिसात पर बागी हुए चेतन बरागटा (Chetan Baragta) ने पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह (Virbhadra Singh) का नाम लेकर नया पेंतरा चल दिया है। बागी की नजर बीजेपी और कांग्रेस दोनों धड़े की तरफ है। चेतन ने जीत के लिए अब पिता के साथ पूर्व सीएम का नाम लेकर कांग्रेस के कार्डर में सेंधमारी की कोशिश की है।
नाम की सियासत
पांच दशक बाद ऐसा पहली बार है, जब हिमाचल की सियासत राजा वीरभद्र सिंह की गैरमौजूदगी में लड़ी जा रही है। राजा वीरभद्र सिंह भले ही पंचतत्व में विलीन हो गए हों, लेकिन ऊनके नाम पर सियासी रोटी खूब सेंकी जा रही है। कांग्रेस (Congress) और राजा परिवार ही नहीं, बल्कि कांग्रेस और बागी भी उनके नाम पर अपनी सियासी रोटी सेंक रहे हैं। प्रतिभा सिंह वीरभद्र के नाम पर वोट मांग रही है, सीएम खुद वीरभद्र सिंह के प्रति अपनी सहानुभूति दिखाते नहीं थकते। वहीं, अब बगावती चेहरे चेतन ने वीरभद्र सिंह का नाम लेकर जुब्बल कोटखाई में नया ट्रंप कार्ड खेल दिया है।
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वीरभद्र समर्थकों पर चेतन की नजर
चेतन की नजर वीरभद्र सिंह के समर्थकों पर है, और कमोवेश जुब्बल कोटखाई में कांग्रेस का जो धड़ा रोहित ठाकुर से नाराज चल रहा है। वह उसे अपने पक्ष में लाने की कोशिश करते हुए दिख रहे हैं। परसेप्शन और सोशल मीडिया आईटी सेल के माहिर खिलाड़ी चेतन बरागटा बखूबी यह बात जानते हैं कि अगर उन्हें इस उपचुनाव में जीत हासिल करनी है, तो सिर्फ अपने पिता नरेंद्र बरागटा के नाम पर वह बीजेपी के सिर्फ एक धड़े को तोड़ पाएंगे, जबकि जीत के लिए कांग्रेसी कार्डर के हाथ का साथ भी चाहिए। इसलिए चेतन लगातार खुद को भाजपाई कम बागवान ज्यादा बता रहे हैं, क्योंकि हिमाचल की सियासत में बागवानों के अगर कोई सबसे अधिक करीब रहा तो वह वीरभद्र सिंह थे। अब उनके इस कोशिश के इसके नतीजे तो 2 नवंबर को ईवीएम खुलने के बाद ही पता चल पाएगा कि वे नाम कि सियासत कर हिमाचल की राजनीति में नया सितारा बनकर उभरेंगे। यहां उनका राजनीति कैरियर चुनावी नतीजों के बाद कोटखाई के खाई में प्रवेश कर जाएगा।
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