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बच्चों पर ना थोपें उम्मीदों का बोझ-विश्वास, ईमानदारी और बेहतर रिवीज़न सफलता का मंत्र
HPBOSE: हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की परीक्षाओं की आहट के बीच बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने विद्यार्थियों और अभिभावकों के नाम एक बेहद संवेदनशील और प्रेरक संदेश जारी किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि परीक्षा के इन महत्वपूर्ण दिनों में बच्चों को ‘डर’ की नहीं, बल्कि ‘अपनो के साथ’ की जरूरत है। डॉ. शर्मा ने अभिभावकों से अपील की है कि वे घर में परीक्षा का तनावपूर्ण माहौल बनाने के बजाय बच्चों के प्रति सहयोगात्मक और सकारात्मक नजरिया अपनाएं, ताकि छात्र बिना किसी मानसिक दबाव के अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें।बोर्ड अध्यक्ष ने छात्रों की मेहनत और ईमानदारी पर गहरा भरोसा जताते हुए कहा कि हिमाचल के विद्यार्थी अनुशासित और नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण हैं। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे किसी भी प्रकार के शॉर्टकट या अनुचित साधनों के जाल में न फंसकर अपनी मेहनत पर यकीन रखें।
सफलता की सबसे बड़ी कुंजी आत्मविश्वास
डॉ. शर्मा के अनुसार, “सफलता की सबसे बड़ी कुंजी आत्मविश्वास और प्रोत्साहन है, न कि दबाव।” उन्होंने अभिभावकों को याद दिलाया कि उनकी ओर से दिया गया भावनात्मक सहयोग ही छात्र के मनोबल को सबसे ऊंचे स्तर पर ले जा सकता है।परीक्षा की तैयारी को लेकर मार्गदर्शन देते हुए डॉ. शर्मा ने विद्यार्थियों से शांत मन से रिवीज़न करने का आग्रह किया है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि किसी विषय में असहजता महसूस हो रही हो, तो पूरे सिलेबस से घबराने के बजाय मुख्य अध्यायों और महत्वपूर्ण प्रश्नों पर ध्यान केंद्रित करें। संतुलित तैयारी न केवल तनाव को कम करती है, बल्कि प्रदर्शन में भी निखार लाती है। बोर्ड ने अंत में यह विश्वास जताया है कि संयम, समर्पण और सही दिशा में किए गए प्रयास से प्रदेश के बच्चे अपने परिश्रम का उचित परिणाम अवश्य प्राप्त करेंगे।
अमित महाजन
