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हिमाचल के पड़ोस में हर तीसरे व्यक्ति के पास नहीं रहा कोई काम, महंगाई की पड़ी मार
योग दिवस पर पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) जिस वक्त योग करने का संदेश दे रहे थे उसी वक्त बेरोजगार अपने लिए रोजी-रोटी की तलाश कर रहे थे। यानी बेरोजगारों के लिए पीएम का योग (Yoga) वाला संदेश किसी काम का नहीं। कोरोना की दूसरी लहर के बीच आर्थिक सुस्ती ने कईयों के मुंह से निवाला छीन लिया है। हालत ये है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बेरोजगारी की दर 45.6 फीसदी पहुंच चुकी है यानी कि हर दूसरा आदमी बेरोजगार हो चुका है। हिमाचल के पड़ोसी राज्य हरियाणा (Neighborhood of Himachal) की हालत ये है कि हर तीसरे व्यक्ति के पास कोई काम नहीं है। मतलब हर तीसरा व्यक्ति सड़क पर आ चुका है।
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बेरोजगारी चरम पर है, आंकड़े गवाह है कि हरियाणा (Haryana) में बेरोजगारी दर 29.1 फीसदी, तमिलनाडु में 28 फीसदी व राजस्थान में 27.6 फीसदी हो गई है। इसका अर्थ यह है कि इन राज्यों में लगभग हर तीसरे व्यक्ति के पास कोई काम नहीं है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (Center for Monitoring Indian Economy) के आंकड़ों के अनुसार इस समय राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी (Unemployment) दर में हालांकि कुछ सुधार आया है जोकि अब 10.8 फीसदी पर पहुंच गया है। मई माह के अंत में यह 11.9 फीसदी पर था। शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 12.9 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में 9.8 फीसदी तक पहुंच गई है।
ज्यादा बेरोजगारी वाले राज्यों में पुडुचेरी में 24 फीसदी, गोवा में 20.6 फीसदी, बिहार में 13.8 फीसदी, आंध्र प्रदेश में 13.5 फीसदी, जम्मू-कश्मीर में 12.1 फीसदी, झारखंड में 16 फीसदी, केरल में 23.4 फीसदी, त्रिपुरा में 20 फीसदी और पश्चिम बंगाल में 19.3 फीसदी दर्ज हुई है। सबसे कम बेरोजगारी वाले राज्यों में असम सबसे ऊपर है जहां केवल 0.1 फीसदी लोगों के पास रोजगार नहीं है। इसके बाद गुजरात में 2.3 फीसदी, कर्नाटक में 5.3 फीसदी, मध्यप्रदेश में 5.3 फीसदी, ओडिशा में 7 फीसदी, उत्तराखंड में 5.5 फीसदी और उत्तर प्रदेश में 6.9 फीसदी लोग बेरोजगार हैं।
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