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कालभैरव जयंती आज, शुभ-मुहूर्त में करें पूजा; जानें कथा और पूजा विधि
आज कालभैरव जयंती 2023 हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर भगवान शिव (Lord Shiva) के क्रोध से काल भैरव की उत्पत्ति हुई थी, जिन्हें दंडनायक माना जाता है। बाबा कालभैरव (Baba KalBhairav) शिवजी के पांचवें स्वरूप हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से कालभैरव को पूजा जाए तो सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती हैं। आइए जानते हैं काल भैरव जयंती की पूजा का शुभ-मुहूर्त, कथा और विधि।
शुभ-मुहूर्त (Auspicious Time)
मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी तिथि शुरू – 4 दिसंबर 2023, रात 09 बजकर 59
मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी तिथि समाप्त – 6 दिसंबर 2023, प्रात: 12 बजकर 37
पूजा का समय- सुबह 10.53- दोपहर 01.29
निशिता काल मुहूर्त – 5 दिसंबर, रात 11.44 – देर रात 12.39, 6 दिसंबर
काल भैरव जयंती 2023 शुभ योग
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काल भैरव जयंती की कथा (Story of Kalbhairav Jayanti)
धार्मिक कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी और श्री हरि के बीच सर्वश्रेष्ठ कौन है इसको लेकर बात चली। जब सभी देवताओं ने इस आपस में बैठकर बात की तो यह निष्कर्ष निकला कि सबसे श्रेष्ठ केवल महादेव हैं। यह बात भगवान ब्रह्मा जी को रास ना आई और उन्होंने महादेव के बारे में अपशब्द कहे। यह बात जानकर महादेव क्रोधित हो गए और उनके क्रोध से भगवान कालभैरव (Lord Kal Bhairav) की उत्पति हुई। भगवान कालभैरव ने महादेव के अपमान के बदले ब्रम्हा देव का पांचवा मुख धड़ से अलग कर दिया। इस तरह ब्रम्हा जी का घमंड टूटा और काल भैरव की उत्पत्ती हुई।
पूजा-विधि (Worship Method)
-काल भैरव जयंती के दिन भगवान शिव-माता पार्वती और भगवान काल भैरव की पूजा का विधान है।
-इस दिन सुबह जल्दी उठे और स्नान करें।
-आप व्रत कर रहे हैं तो व्रत (Vrat) का संकल्प लें।
-बाद में शुभ-मुहूर्त में पूजा करें। इसके लिए चौकी पर काल भैरव की प्रतिमा स्थापित करें।
-बाबा को फूलों की माला अर्पित करें। फल-मेवा, मिठाई का भोग लगाएं।
-कालभैरव अष्टमी का पाठ करें और आखिर में आरती (Arti) करें।
-इस दिन काले कुत्तों को खाना जरूर खिलाएं।

