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अंधाधुध निर्माण ने खोखली कर दिए हिमाचल के पहाड़, अब भुगतने पड़ रहे नतीजे

अंधाधुध  निर्माण ने खोखली कर दिए हिमाचल के पहाड़, अब भुगतने पड़ रहे नतीजे

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शिमला। हिमालय रीजन (Himalaya Region) की पहाड़ियों को विकास ने नाम पर अंधाधुंध तरीके से खोदा गया। जिसके नतीजे अब दिखने लगे हैं।इसका नुकसान हिमाचल में खासतौर पर देखा जा रहा है। साल दर साल हिमाचल के पहाड़ दरक रहे हैं। मानसून (Monsoon) के दौरान कई हादसों में लोगों ने अपनों को खो दिया है। अब रिपोर्ट सामने आ रही है कि विकास की अंधी दौड़ प्रदेश के लिए काल साबित हो रही है। बीते कुछ सालों से हिमाचल में प्राकृतिक आपदा की घटनाओं में भारी इजाफा देखा गया है। जिसके एक नहीं कई उदाहरण सामने हैं। हिमालय रीजन के पहाड़ों पर किए गए कई रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों ने कई रिपोर्ट पेश किए। उन्होंने इन रिपोर्टों के जरिए चेतावनी दी गई कि अगर पहाड़ों की कटाई (Hills Cutting) नहीं रोकी गई तो अंजाम बहुत बुरे होंगे। इस सिलसिले में मध्य हिमालयी भू-भाग (Mid Himalaya Region) की कच्ची चट्टान काटकर बनाए जा रहे विशाल बांधों के निर्माण भी शामिल हैं। जो आए दिन हो रहे हादसों की सबसे बड़ी जड़ बताई जा रही है।

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खोखले हो चुके हैं किन्नौर की पहाड़ी

वहीं, हिमाचल प्रदेश के किन्नौर (Kinnour) में हुए हादसे का कारण भी अंधाधुंध पेड़ों की कटाई और निर्माण की होड़ को बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि किन्नौर में पनबिजली प्रोजेक्ट (Power Project) की वजह से पहाड़ खोखले हो गए हैं। पहाड़ों में लगातार ब्लास्टिंग होने के कारण लैंडस्लाइड (Landslide) की घटनाओं में भारी इजाफा देखा गया है। बताया जाता है कि किन्नौर रीजन में सतलुज नदी (Satluj River) के बेसिन पर 22 पनबिजली प्रोजेक्टों का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही सड़कों के चौड़ीकरण के लिए होने वाले ब्लास्टिंग भी कई हद तक लैंडस्लाइड के कारक बताए जा रहे हैं। मालूम हो कि किन्नौर की अधिकांश पहाड़ी अतिसंवेदनशील जोन में आती है। मानसून में यहां कई बार पहाड़ दरकते हैं। जानकारों का कहना है कि किन्नौर और प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में होने वाले भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए वैज्ञानिक आधार पर उचित कदम उठाए जाने चाहिए। बता दें कि बीते आठ बरस में हिमाचल में लैंडस्लाइड के दौरान करीब 428 लोगों की सांसें टूटी है।

हादसों में मौत

11 अगस्त 2021 : जगह- किन्नौर, लैंडस्लाइड के दौरान अब तक 14 लोगों की मौत
25 जुलाई 2021 : जगह किन्नौर, लैंडस्लाइड के दौरान 9 लोगों की मौत
12 जुलाई 2021 : जगह कांगड़ा , लैंडस्लाइड के कारण 10 लोगों की मौत
23 जुलाई 2017 : जगह पठानकोट-मंडी राजमार्ग, लैंडस्लाइड में 49 लोगों की मौत
18 अगस्त 2015: जगह- मणिकर्ण, चट्टान गिरने से 8 लोगों की मौत
18 अगस्त 2010: जगह- मंडी , लैंडस्लाइड में 45 लोगों की मौत
30 जुलाई 2021: जगह- सिरमौर, लैंडस्लाइड के दौरान करोड़ों का नुकसान, कोई हताहत नहीं
9 अप्रैल 2021: जगह- नूरपुर, खाई में गिरी स्कूल बस के गिरने से बच्चों समेत 27 की मौत
20 अप्रैल 2017 : जगह- शिमला, खाई में गिरी बस 45 की मौत
23 जुलाई 2015: जगह- कुल्लू , पार्वती नदी में गिरी बस, 17 की मौत
5 नवंबर, 2016 : जगह- मंडी, ब्यास में गिरी बस, 17 की मौत
20 मई, 2016 : जगह- चंबा, बस हादसे में 14 की मौत और 31 घायल
21 अगस्त, 2014 : जगह- किन्नौर, बास्पा नदी में गिरी बस, 23 मरे और 20 घायल
27 सितंबर, 2013 : जगह- रेणुका में ददाहू-टिक्कर संपर्क मार्ग पर निजी बस गहरी खाई में गिरी। बस सवार सभी 21 लोगों की मौत
8 मई 2013 : जगह- मंडी के झीड़ी में जोगणी माता मंदिर के पास ब्यास नदी में समाई बस, 40 मरे
11 अगस्त, 2012 : जगह- चम्बा-धुलाडा मार्ग पर गागला के पास बस हादसे में 52 मरे।

मातम की तरह बरसती है बारिश

बारिश प्रदेश में मातम की तरह बरसती है। बीते पांच सालों में मानसून के समय हादसों में मरने वालों का आंकड़ा 1009 तक जा पहुंचा है। साल 2017 में

75, 2018 में 343, 2019 में 307 , 2020 में 284 और साल 2021 में अबतक 222 लोगों को बारिश लील चुका है। गंभीर बात यह है कि अभी पूरा अगस्त और सितंबर बाकी है। वहीं, बात अगर नुकसान की करें तो साल दर साल हिमाचल को लगभग 800 करोड़ रुपए का चूना लग जाता है।

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