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भौम प्रदोष व्रत में भोले शंकर की पूजा से मिलता है शुभ फल
हिंदू धर्म में हर व्रत को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। इन्हीं में से एक है प्रदोष व्रत है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत 22 जून 2021 यानी मंगलवार को है। मंगलवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष व्रत (Bhaum Pradosh Vrat) कहा जाता है। इस व्रत में भगवान शिव की पूजा की जाती है। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव (Lord Shiva) की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करने से भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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इस व्रत को करने वाले भक्तों पर भगवान शिव और हनुमान की कृपा बनी रहती है। व्रत करने वाला सभी कर्ज से मुक्त हो जाता है और आर्थिक रूप से उसे मजबूती मिलती है। संतान प्राप्ति के लिए भी इस व्रत का विशेष महत्व है। प्रदोष व्रत में फलाहार का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन प्रातः दूध का सेवन करने के बाद पूरे दिन निर्जला व्रत करना चाहिए और प्रदोष काल में पूजन के पश्चात फलाहार लेना चाहिए।
प्रदोष काल का समय-
प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में करनी चाहिए। सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक का समय प्रदोष काल कहा जाता है। कहा जाता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मुहूर्त की बात करें तो इस बार प्रदोष व्रत के दिन सिद्ध योग के साथ साध्य योग बन रहा है। इस दिन त्रिष्पुकर योग का भी शुभ संयोग बन रहा है। 22 जून को सुबह 10 बजकर 22 मिनट तक सिद्ध योग रहेगा, इसके बाद साध्य योग बनेगा।
ये रहेगा प्रदोष व्रत पूजा का मुहूर्त-
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 03:36 बजे से सुबह 04:18 तक।
- अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:23 बजे से दोपहर 12:17 बजे तक।
- विजय मुहूर्त- दोपहर 02:07 से 03:02 बजे तक।
- गोधूलि मुहूर्त- शाम 06:28 से 06:52 बजे तक।
- अमृत काल- शाम 06:27 से 07:54 बजे तक।
- त्रिपुष्कर योग- सुबह 04:59 से सुबह 10:22 तक।

