Covid-19 Update

2,06,589
मामले (हिमाचल)
2,01,628
मरीज ठीक हुए
3,507
मौत
31,767,481
मामले (भारत)
199,936,878
मामले (दुनिया)
×

यहां कपड़े से ढकने पड़ रहे बर्फ के पहाड़, जानिए क्या है वजह

खास तकनीक से बनाई गई हैं कपड़े की यह पट्टियां

यहां कपड़े से ढकने पड़ रहे बर्फ के पहाड़, जानिए क्या है वजह

- Advertisement -

आपने हमेशा से यही सुना होगा कि पहाड़ बर्फ से ढके हुए हैं। अगर हम कहें के पहाड़ों को कपड़े से ढका जा रहा है तो आपको ये सुनकर थोड़ा अजीब जरूर लगेगा, लेकिन ये बिलकुल सच है। जलवायु में तेजी से हो रहा परिवर्तन और बढ़ता तापमान बड़े खतरे की तरफ इशारा कर रहे हैं। ग्लेशियर(Glacier) की बर्फ पिघल रही है, समुद्रों का जल स्‍तर बढ़ रहा है, दुनिया की सबसे ठंडी जगह के लोग भी अब गर्मी में झुलस रहे हैं। यह हालात प्रकृति के आने वाले प्रकोप की बड़ी आहट हैं। इटली में क्लाइमेट चेंज का चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां का एक ग्‍लेशियर तेजी से सिकुड़ रहा है और उसे टूटने से रोकने के लिए विशेषज्ञ कई तरह की कोशिशें कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें: इस गांव में कभी नहीं होती बारिश, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह

उत्तरी इटली का प्रेसेना ग्लेशियर (Presena Glacier) तेजी से पिघल रहा है और जल्‍द ही इसके टूटने का खतरा पैदा हो गया है। ग्‍लेशियर का टूटना बड़ी तबाही ला सकता है इसको देखते हुए जलवायु विशेषज्ञ इस ग्‍लेशियर को कपड़े की लंबी पट्टियों से ढकने में लगे हुए हैं। कपड़े की यह पट्टियां खास तकनीक से बनाई गई हैं, यह सूर्य की गर्म किरणों को रिफ्लेक्‍ट करेंगी, ताकि कपड़े के नीचे की बर्फ ना पिघले। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सुरक्षात्‍मक आवरण 70 फीसदी बर्फ को पिघलने से रोकेगा। यह कवर वैसे ही काम करेगा जैसे कार की विंडो पर सिल्‍वर रिफ्लेक्टिव गार्ड लगाए जाते हैं ताकि कार के अंदर का तापमान नियंत्रित रहे।


यह भी पढ़ें: इस झील पर हर समय कड़कती रहती है आसमानी बिजली, अनसुलझा है राज

इस ग्लेशियर को ढकने का यह काम कम से कम एक महीने का समय लेगा। 2008 से हर साल इस ग्‍लेशियर को गर्मी के मौसम में पिघलने से बचाने के लिए इसी तरह ढका जा रहा है। 1.2 लाख वर्ग मीटर का यह ग्‍लेशियर 5 मीटर चौड़ी और 70 मीटर लंबी कपड़े की कई पट्टियों से ढका जाएगा। ट्रेंटो साइंस म्‍यूजियम के ग्लेशियोलॉजिस्ट क्रिश्चियन कैसरोटो का कहना है कि ग्लेशियर का इस तरह पिघलना ग्लोबल वार्मिंग का सबसे अहम संकेत है। पिछले 15-20 सालों से ग्लेशियर पिघलता जा रहा है। हम किस दिशा में जा रहे हैं और उसके कारण पैदा हुई स्थितियों को कैसे ठीक किया जा सकता है, इसे जानने के लिए ग्लेशियर्स का अध्ययन करना बहुत महत्वपूर्ण है।

हिमाचल और देश-दुनिया की ताजा अपडेट के लिए join करें हिमाचल अभी अभी का Whats App Group 

 

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper


विशेष




सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है