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हिमाचल अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ की मान्यता पर भड़का दूसरा गुट

बिलासपुर में एनआर ठाकुर गुट ने सरकार को दी कड़ी चेतावनी

हिमाचल अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ की मान्यता पर भड़का दूसरा गुट

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बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (एनआर ठाकुर गुट) (Himachal Non-Gazetted Employees Federation) ने प्रदेश सरकार (State Govt) की ओर से महासंघ की मान्यता (Recognition) को लेकर लिए गए निर्णय के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। चेतावनी दी है कि प्रदेश सरकार की ओर से यदि महासंघ की मान्यता को लेकर अपना निर्णय नहीं बदला तो कर्मचारी आगामी विधानसभा उपचुनाव (Vidhan Sabha By-Election) के साथ ही लोकसभा उपचुनाव में सरकार के खिलाफ खड़े होंगे। रविवार को राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बिलासपुर (Bilaspur) में हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (एनआर गुट) का फेडरेल हाउस का आयोजन किया गया, जिसमें ऊना, लाहुल स्पीति को छोड़ प्रदेश भर से 10 जिलों के महासंघ प्रधान के साथ ही महासचिव सहित अन्य पदाधिकारियों ने शिरकत की।

 

 

महासंघ प्रदेश अध्यक्ष एनआर ठाकुर के साथ ही राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष विपिन डोगरा ने विशेष रूप से शिरकत की। इस दौरान सरकार को विधानसभा चुनाव के दौरान और बीजेपी सरकार (BJP Govt) के कार्यकाल में महासंघ की ओर से सौंपे गए 56 सूत्रीय मांग पर कोई भी उचित कदम नहीं उठाने को लेकर सरकार के खिलाफ रोष जताया गया। प्रदेश अध्यक्ष एनआर ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार अपने चार वर्ष के कार्यकाल में कर्मचारियों की मांगों को पूरा करने में असफल रही है। हालांकि कुछ घोषणा सीएम जयराम ठाकुर (CM Jai Ram Thakur) ने की, लेकिन वह अपनी मनमर्जी से की है। उन्होंने कहा कि सीएम की ओर से कर्मचारियों को बिना पूछे ही व्यक्ति विशेष को मान्यता दे दी गई, जोकि सही निर्णय नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को अपना निर्णय बदलना चाहिए। अन्यथा आगामी भविष्य में इसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा।

उधर, राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष विपिन डोगरा ने कहा कि सीएम जयराम ठाकुर द्वारा अपने निर्वाचन क्षेत्र के व्यक्ति को महासंघ का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है, जोकि दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सीएम को इस ओर कर्मचारियों द्वारा चुने गए कर्मचारी नेताओं को प्राथमिकता देनी चाहिए थी, ना कि व्यक्ति विशेष को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी। सरकार इस निर्णय पर पुर्नविचार करे।

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