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Kangra: 1905 से कितना विनाशकारी हो सकता है अब वैसा ही भूकंप- पढ़ें रिपोर्ट

4 अप्रैल 1905 को 8.0 तीव्रता का भूकंप किया था रिकॉर्ड, हजारों लोगों की गई थी जान

Kangra: 1905 से कितना विनाशकारी हो सकता है अब वैसा ही भूकंप- पढ़ें रिपोर्ट

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कांगड़ा। हिमाचल (Himachal) के कांगड़ा (Kangra) जिला के कई लोग आज की तारीख नहीं भूले होंगे। आज से 116 साल पहले कांगड़ा जिला में तबाही का ऐसा मंजर देख गया था कि जिनसे चलते-फिरते शहर की रफ्तार को बिल्कुल थाम दिया था। जी हां हम बात कर रहे हैं 1905 को आज के ही दिन आए भूकंप की। 4 अप्रैल 1905 में सुबह करीब 6 बजकर 19 मिनट पर जब लोगों की दिनचर्या शुरू ही हुई थी कि भूकंप के दो झटकों ने सबकुछ तहस-नहस कर दिया। 20 हजार के करीब लोग गहरी नींद में सो गए थे। उस वक्त करीब 8.0 तीव्रता का भूकंप रिकॉर्ड किया गया था। धर्मशाला , पालमपुर (Palampur), कांगड़ा (Kangra), मैक्लोडगंज और चडी में सबसे अधिक नुकसान हुआ था। इसमें करीब 20 हजार लोगों की मृत्यु हुई थी। वहीं, करीब एक लाख घर क्षतिग्रस्त हुए थे। कांगड़ा जिला के मंदिरों और ऐतिहासित भवनों को क्षति पहुंची थी। उस वक्त कांगड़ा पंजाब के जालंधर (Jalandhar) डिवीजन का भाग हुआ करता था। तबाही के बाद लाहौर से मदद भेजी गई थी। पर सड़कों के क्षतिग्रस्त होने, पुलों के टूट जाने से राहत में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा था।


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वक्त के साथ लोगों के जहन से इस विनाशकारी भूकंप की यादें धुंधली होने लगी थीं कि 15 जून 1978 को एक बार फिर भूकंप ने हिला कर रख दिया। धर्मशाला (Dharamshala) में 5.0 तीव्रता का भूकंप रिकॉर्ड किया गया। गनीमत यह रही कि इस भूकंप से किसी प्रकार के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। लोगों ने राहत की सांस ली। लेकिन, 26 अप्रैल 1986 को एक बार फिर कांगड़ा में धरती कांपी और नरगोटा, नड्डी, कंड, सुक्कड़ और खनियारा में 5.7 तीव्रता का भूकंप रिकॉर्ड किया गया। इसमें 6 लोगों की जान गई थी और करीब 65 करोड़ संपति को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद भी कांगड़ा में भूकंप के झटकों का दौर जारी रहा, लेकिन कोई बड़ा भूकंप अब तक रिकॉर्ड नहीं किया गया है। हिमाचल में हल्के-फुल्के झटके हर साल आते रहते हैं।

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भूकंप की दृष्टि से कांगड़ा जिला जोन चार और पांच में आता है। इसे वेरी हाई रिस्क एरिया घोषित किया गया है। कांगड़ा जिला आपदा प्रबंधन योजना 2017 (District Disaster Management Plan for Kangra, 2017) की बात करें तो क्षति और हानि के परिदृश्य अब भूकंप 1905 जैसा भूकंप और अधिक विनाशकारी हो सकता है। क्योंकि राज्य और जिला कांगड़ा में आबादी 1991 के बाद कई गुना बढ़ गई है। भूकंप में तबाही के वर्तमान अनुमान के अनुसार 340,000 से अधिक का नुकसान जीवन पर तब होगा जब भूकंप सर्दियों के महीनों की आधी रात को आए। इस संख्या के आधे हिस्से में नुकसान तब होगा जब यह सुबह में होगा, जब लोग जाग रहे हैं या सो रहे होंगे। शहरी सुविधाओं विशेष रूप से अस्पतालों, स्कूलों, संचार भवनों, परिवहन मार्गों में पहाड़ी क्षेत्र और जल आपूर्ति सुविधाओं को बहुत नुकसान होगा। इससे साफ है कि आधी रात को अगर भूकंप आता है तो ज्यादा लोगों की जान का नुकसान होगा। अलसुबह भूकंप से इससे कम और दिन यानी दोपहर आदि में आता है तो काफी कम नुकसान होगा।

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इस साल अब तक 15 बार से अधिक आया भूकंप

हिमाचल (Himachal) में जनवरी माह से अब तक 15 बार से अधिक भूकंप आया है। सबसे ज्यादा बार चंबा (Chamba) जिला में 9 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। फरवरी माह में पांच और मार्च माह में अब तक पांच बार भूकंप आ चुका है। 12, 14, 20 और 25 फरवरी को दो बार भूकंप आया है। मार्च में 8 मार्च को दो बार, 9 मार्च को दो बार और 10 मार्च को एक बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। आठ मार्च को चंबा में 3.6 और 3.5 तीव्रता का भूकंप आया था। भूकंप का केंद्र जमीन से पांच किलोमीटर नीचे था। एक भूकंप सुबह 10 बजकर 20 मिनट पर आया और फिर करीब 18 मिनट बाद 10 बजकर 38 मिनट पर फिर से भूकंप के झटके महसूस किए गए। इससे अगले दिन 9 मार्च को भी चंबा में भूकंप के झटके महसूस हुए। इस बार भी 3.5 तीव्रता का भूकंप रिकॉर्ड किया गया। भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर नीचे था और दोपहर 12 बजकर 34 मिनट पर झटके महसूस किए गए। 9 मार्च को लाहुल स्पीति में 2.8 तीव्रता का भूकंप आया था। भूकंप रात करीब साढ़े 11 बजे रिकॉर्ड किया गया। इसका केंद्र जमीन से 5 किलोमीटर नीचे था। 10 मार्च को सुबह करीब 7 बजकर 50 मिनट पर लाहुल स्पीति में एक बार फिर धरती डोली और 3.4 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र जमीन से पांच किलोमीटर नीचे था। 12 फरवरी को हिमाचल सहित दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में भूकंप (Earthquake) के तेज झटके महसूस किए गए। भूकंप करीब 10 बजकर 35 मिनट पर आया। 14 फरवरी दोपहर 3:49 बजे प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.2 रही। भूकंप का केंद्र बिलासपुर (Bilaspur) रहा। बिलासपुर के अलावा राजधानी शिमला (Shimla) में कई लोगों ने भूकंप के झटके महसूस किए और वे घरों से बाहर निकल आए थे। भूकंप का केंद्र 10 किमी गहराई में था।

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इसके बाद 20 फरवरी को चंबा में 2.8 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप के झटके सुबह 3 बजकर 55 मिनट पर महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र जमीन से पांच किलोमीटर नीचे था। 25 फरवरी को कांगड़ा में 2.2 और चंबा में 2.4 तीव्रता का भूकंप रिकॉर्ड किया गया। कांगड़ा में सुबह 2 बजकर 33 मिनट और चंबा में सुबह 3 बजकर 55 मिनट पर भूकंप आया। 11 जनवरी को जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में भूकंप आया। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.1 आंकी गई है। भूकंप इतना जोरदार था कि कांगड़ा और चंबा में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप रात 7 बजकर 32 मिनट और 4 सेकंड पर आया। जम्मू-कश्मीर में जमीन से पांच किलोमीटर भूकंप का केंद्र रहा है। 9 जनवरी को भी कांगड़ा (#Kangra) जिला के धर्मशाला (Dharamshala), पालमपुर और आसपास के क्षेत्रों में भूकंप (Earthquake) के झटके महसूस किए गए। भूकंप 8 बजकर 21 मिनट 50 सेकंड पर आया था। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 4.2 आंकी गई है। भूकंप का केंद्र करेरी में जमीन से 10 किलोमीटर नीचे था। 5 जनवरी को चंबा में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। भूकंप दोपहर एक बजकर 9 मिनट पर आया था। इसका केंद्र जमीन से पांच किलोमीटर नीचे था। तीव्रता 3.2 थी। वहीं, चंबा में दो जनवरी को रात करीब पौने 12 बजे भी 2.6 तीव्रता भूकंप आया था। अभी पिछले कल ही आधी रात करीब 12 बजकर 20 मिनट पर लाहुल स्पीति में धरती कांपी है।

भूकंप आने पर क्या करें

भूकंप आने पर कुछ सावधानियां बरतने से बचाव किया जा सकता है। अगर भूकंप आने के वक्त आप घर में हैं तो फर्श पर बैठ जाएं। घर में किसी मजबूत टेबल या फर्नीचर के नीचे बैठकर हाथ से सिर और चेहरे को ढकें। भूकंप के झटके आने तक घर के अंदर ही रहें और झटके रुकने के बाद ही बाहर निकलें। अगर रात में भूकंप आया है और आप बिस्तर पर लेटे हैं तो लेटे रहें, तकिए से सिर ढक लें। घर के सभी बिजली स्विच को ऑफ कर दें। अगर आप भूकंप के दौरान मलबे के नीचे दब जाएं तो किसी रुमाल या कपड़े से मुंह को ढंके। मलबे के नीचे खुद की मौजूदगी को जताने के लिए पाइप या दीवार को बजाते रहें, ताकि बचाव दल आपको तलाश सके। अगर आपके पास कुछ उपाय ना हो तो चिल्लाते रहें और हिम्मत ना हारें।

भूकंप आने पर क्या ना करें

भूकंप के वक्त अगर आप घर से बाहर हैं तो ऊंची इमारतों और बिजली के खंभों से दूर रहें। अगर आप गाड़ी चला रहे हो तो उसे रोक लें और गाड़ी से बाहर ना निकलें। किसी पुल या फ्लाइओवर पर गाड़ी खड़ी ना करें। भूकंप के समय अगर आप घर में हैं तो बाहर ना निकलें। अगर आप भूकंप के वक्त मलबे में दब जाएं तो माचिस बिल्कुल ना जलाएं, इससे गैस लीक होने की वजह से आग लगने का खतरा हो सकता है। भूकंप आने पर घर में हैं तो चलें नहीं। सही जगह ढूंढें और बैठ जाएं। घर के किसी कोने में चले जाएं। कांच, खिड़कियों, दरवाज़ों और दीवारों से दूर रहें। भूकंप के वक्त लिफ्ट के इस्तेमाल बचें। कमज़ोर सीढ़ियों का इस्तेमाल ना करें। लिफ्ट और सीढ़ियां दोनों ही टूट सकती हैं। भूकंप में अगर मलबे में दब जाएं तो ज़्यादा हिले नहीं और धूल ना उड़ाएं। आपके आप-पास जो चीज़ मौजूद हो उसी से अपनी मौजूदगी जताएं। भूकंप के दौरान आप पैनिक ना करें और किसी भी तरह की अफवाह ना फैलाएं।

हले से तैयारी कैसे करें

आपको एक इमरजेंसी किट बनाकर रखनी चाहिए, जिसमें आपके जरूरी दस्तावेज, खाना, पानी और फर्स्ट की चीज हो। घर के सामान को सुरक्षित रखने की कोशिश करें और छत या किसी दीवार के गिरने की स्थिति में जरूरी सामान को बचाने के उपाय करें। अपने परिवार के लिए एक इमरजेंसी प्लान तैयार करें जिसमें हर व्यक्ति के कामकाज या जिम्मेदारी का जिक्र हो।

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